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“शिवपार्वतीरो आदिम रुप गणगोर”;- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

Share this on WhatsAppअनवाल – “शिवपार्वतीरो आदिम रुप गणगोर” ई निसर्गशक्तीरो ऊर्जामय संयुक्त स्त्रीपुरुष रुप छ.कांयी कांयी तांडेमं गणगोर ये संयुक्त आदिम देवतार नातो ‘राधाकृष्णेती’जोडन गणगोरेर जागं राधाकृष्णेर
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गोर बोलीभाषा सौंदर्य – अपहुन्ती अलंकार – भिमणीपुत्र,

Share this on WhatsAppवाते मुंगा मोलारीMy swan songगोर बोलीभाषा सौंदर्य –अपहुन्ती अलंकार –अर्थालंकारेमं जे वस्तूनं उपमा देन रचं ओनं उपमेय कचं अन जे वस्तूर उपमा देन रचं ओनं
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अनवाल -“मराठी,हिंदी भाषार प्रभावेती गोर बोलीभाषारो मूळ अस्तित्व धोकेम” :-भिमणीपुत्र मोहन गणुजी नायक

Share this on WhatsAppअनवाल -“जतरा मराठी,हिंदी भाषार प्रभावेती गोर बोलीभाषारो मूळ अस्तित्व धोकेम आयो;ओतरा तेलगु अन कानडी भाषाती गोर बोलीभाषारो अस्तित्व धोकेम कोनी आयो.आज भी आंध्र,तेलंगणा,कर्नाटक राज्येमं गोरबोली
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गोर बोलीभाषारो अलंकार संपन्न लावण्य रुप – उत्प्रेक्षा…भिमणीपुत्र,

Share this on WhatsAppवाते मुंगा मोलारी My swan song गोर बोलीभाषारो अलंकार संपन्न लावण्य रुप – उत्प्रेक्षा… अलंकार संपन्न गोर बोलीभाषारो लावण्य रुप इ गेणागाठा घालन सणगारी हुयी
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गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन…!:- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

Share this on WhatsAppवाते मुंगा मोलारी My swan song गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन…! गोर बोलीभाषार अभ्यास करतूवणा गोर बोलीभाषारो पेनो (प्राचीनता),ओर जतन करो हूवो परंपरागत
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धनात्री..भिमणीपुत्र मोहन नायक

Share this on WhatsAppवाते मुंगा मोलारी My swan song धनात्री…. “हामार तांडेमं पानढाळ करेवाळर ८\१० मनक्यार एक टोळी छ.ओनेनं मोट धनात्रीवाळ कचं.आज ओ से भळन रानेम जान पूजापाती
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धडधडी- थरथरी एक वैज्ञानिक सिद्धांत..!:- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

Share this on WhatsAppवाते मुंगा मोलारी My swan song धडधडी- थरथरी एक वैज्ञानिक सिद्धांत..! “देवीनं बळी देयेर पाट मरेन आरीती करन;मन बेमार पाट बळी देरे छो;येती देवी आपणेनं
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पुस्तक इन्ती पुस्तक करचं..!:- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

Share this on WhatsAppराम पोर – “तैलात रक्षेत जलात रक्षेत रक्षेत शिथिल बंधनात! मुर्ख हस्ते न दातव्यं ! एवं वदति पुस्तकम् ! तेलेती,पाणीती छेटी रकाडन मार रक्षण करो
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तमारो आजेरो “गोरबोली भाषा विज्ञान अन् व्याकरण ” – एक चिंतन !! भाग – २ ,- मा.राजाराम जाधव,नवी मुंबई,

Share this on WhatsAppनायक जी, जय सेवालाल, तमारो आजेरो “गोरबोली भाषा विज्ञान अन् व्याकरण ” – एक चिंतन !! भाग – २ , “गोर बोली भाषारो भाषिक रूप
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