“गर्व का इतिहास और शर्म का वर्तमान”

“गर्व का इतिहास और शर्म का वर्तमान”
एक बंजारा नाम का प्राचीन समाज था जिसमें गोर समाज के पहले गुरू देमा गुरू के शब्द सिकच सिकावच सिके राज धघडावच,सिके जेरी साज पोळी,जैसे शब्दों का उच्चारन अबतक समाज के होटोंपर होली के दिन गुंजता है। और समाज के महान संतों मे पिठा गौर,क्रान्तिवीर सेवालाल महाराज जैसे संत तथा शुरविर होकर समाज के अध्ययन कि सुरवात सच्चे और दिल से कि थी. गोर माटी (बंजारा) समाज के महान विर योद्धा  आला ,उद्दल ,जयचंद राठौड़, पृथ्वीराज चव्हाण,राजा भोज,लखिशा बंजारा जैसे अनेक शासक तथा महान योद्धा रहते थे इन्होंने पूरा जीवन बंजारों को विस्थापित करने में व्यतीत किया और उन्होंने जो दायित्व निभाया. ”समाज को इन महान महामानव के पर गर्व है” इस प्राचीन समाज के जिन्हें पुरातन इतिहास के अनुसार गोर माटी (बंजारा) समाज अपनी जीवन शैली,पोषाख, तथा अपने त्योहार अपने खुद के माध्यम से मनाता है।गोर माटी समाज कि इतनी बढ़िया जिवन शैली है कि इस जगत मे सबसे अलग कहलाती है। उनके अनुरूप के नुसार जीवन शैली को बढावा देते है, और समाज  कि अगल से पहचान थी, एकता थी न्याय व्यवस्था थी,संस्कार थे राजा भोज जैसे उत्तम शासक थे जिनका शासन तथा न्यायिक व्यवस्था की झलक भारत के आज़ादी के बाद संविधान में दिखाई देती है! सेवालाल बापू के बोल एक विश्व प्रतिज्ञा है! जिस में सबकी भलाई के लिए उजागर करते हैं! इन महापुरुषों का उत्तर दायित्व निभाने क़े लिए पूज्य फुलसिंग जी के सुपुत्र वसंतराव नाईक़ इनके ऊपर आ पढ़ और इन्होंने उनके कार्यकाल मे हर समाज को परिवर्तित  करने का बीड़ा उठाकर सबको समान न्याय देकर भली भाती निभाया जिसे इतिहास गवाह है। ये था इतिहास
अभी वर्तमान इनके बाद समाज में विद्रोही,विघाटक ,विनाशक मिझास का जन्म हूवा उन्होंने अलग अलग विद्रोही गुट (पार्टी/ संघटन )का आयोजन किया और बंजारों को बेचने का प्रबंध किया इन्होंने बाजार मे ख़रीददार (vote merchant) खोज के उनके साथ शामिल हों गए भारत में लोकशाही के कारण पोषक वातावरण इन गुटो को मील गया. इन गुटों ने समाज तथा भाई बहन माँ बाप तथा ख़ुद एवं ख़ुद की बीबी बच्चे सगे सम्बंधी को भी ख़रीदारी (vote merchant)करनेवालो को पैसे के लालच में बेच डाला जिसे उन्हें ओटों में कैश कर लिया है ! कर रहे हैं! इसका प्रत्यय चुनाव प्रक्रियायों में नज़र आ रहा है!अपने क़ौम के ऊमेद्वार को पराजय कैसा हो इसका अध्ययन करते हैं! इन्होंने समाज को बेचने का ये तरीखा अपनाया क्यों कि गोर समाज भरोसा बहोत करता हैं! दिल में कभी खोट नहि होती.ओटों के ख़रीदार मंत्री तथा राजनेताओं को मेरे पास मेरे साथ सबमिला के .कितने मतदार है। इसके संख्या के अनुसार रक़म लेते है ! ओर ख़ुद के साथ पूरे परिवार को और समाज को बेच रहे है! हकिगत ये हैं की बिके हुए को ख़बर तक नहि की ओ बिक चुके है. समाज में इन भेडीयो की संख्या लाखों में है!इस तरह ये समाज को लुटने तथा लुटाने में जुटा रहता है!ये समाज के दलाल स्वघोशित है इनकी क़ाबिलियत जितना गुनाह ज़्यादा,विद्रोही भूमिका,नकारात्मक सोच,सामाजिक स्तर पर अच्छे स्वच्छ इंसान पर लांछन लगाना, नीचा दिखाना,कोई सच्चे दिल से समाजकार्य करे उनके विरुद्ध असंतोष फैलाना,बदी करना ये होता है! अभी इन लोगोने गोर समाज का कोई अस्तित्व नहि रहने दिया! अपाहिज बना डाला कोई भी एकजुट नहि हों सका’ क्यों कि बिके हुए की कोहि( क़ीमत ),अहीमत नहि होती. शादी में भी दलालों के ज़रिए ये आका शादी में नाचने भी आजाते है एक मतदार बढ़ जाने के ख़ुशी में शराब पीके जमके नाचता भी हैं! इन समूहके ठेकेदार ने मुर्दे तक को नहि बक्षा (छोड़ा)जब समाज में किसी का देहांत होती है समाज का दलाल उनके आका ख़रीददार को सूचित करता है वह भी दुख जताने उनके घर पहुँच जाता है उसे असल में दुःख एक मतदार का खोने का होता हैं! और धन्यता प्राप्त कर लेता हैं! इन दलालोने समाज का उत्सव ,जयंती भी दाव पे लगादी इसका भी अनुभव आ रहा हैं। ये ख़रीदार (votter merchant) ने दलालों के सहारे बंजारा समाज को एक निहत्ता, बेठ बिगार बना डाला हैं! ये नकारा नहि जा सकता ये कड़वा सच है कोई अस्तित्व नहि कोई अहीमत नहि! बंजारा समाज का चरित्र हनन हूवा तो जूँ तक रेंगती नहि २०० से ५०० तक लोग विरोध के लिए आते दिखाई देते है! शर्म भी नहि आती क्यों की हमें सोचना ही नहि। शिर्फ नशिहत देना बहुत ख़ूबी से निभाते हैं! आलोचना क़रना मानो ख़ून का एक अंग हो गया हो! समाज विभिन्न प्रवाह चलते नज़र आ रहा हैं! राह दिखाने के अलावा गुमरहा कर रहे है! दलाल जैसे भेड़ियों से नयी युवा पीढ़ी परे रहे गोर समाज को सही राह दिखाए यें बंजारा युवाओं से मेरी विनती हैं।🙏🏻 लिखे हुए दो शब्द मन की पीड़ा हैं! कोई व्यक्तिगत ना लें!👋 इतिहास तथा वर्तमान से शिक लेना’ या नहि यें अपनी अपनी सोच तथा संस्कार के ऊपर निर्भर हैं! ——सुखी चव्हाण, बदलापुर 9930051865

सौजन्य: गोर कैलास डी राठोड

वसंतरावजी नाईक बंजारा परिवर्तन

चळवळ महाराष्ट्र राज्य,

 

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