धर्म…

धर्म…

वलख मार रपीया, काचलीर
वलख मार नव गेणारी
कुं माणू हिंदू धर्मेन
धर्मे मार गोर……।।
अलग रेनो ,अलग बाणो
अलग छ सण,अलग छ तेवार
कुं करण माणू ये धर्मेन…..।।
अलग मारी बोली
अलग मारी होळी
कुं करण भळगे हिंदूम
कुं माणू ये धर्मेन….।।
मोल छेणी मार बोलीर ये
जगेम , सळगो काटा ये धर्मेन..।
काटा काडे लार
लागगे गोर धर्मेर
कुं करन मानू ये धर्मेन
मार धर्म छ गोर…..।।।

कवि.लेखक
प्रदिप मानसंघ जाटोद

सौजन्य:गोर कैलास डी राठोड

आॅनलाईन न्यूज़ पोर्टल मुंबई महाराष्ट्र राज्य.

Leave a Reply