“पिता को क्या चाहिये? सिर्फ सम्मान जनक जिंदगी”

” पिता को क्या चाहिये..?सिर्फ सम्मान जनक जिंदगी”


एक पिता ने अपने पुत्र की बहुत अच्छी तरह से परवरिश की !उसे अच्छी तरह से पढ़ाया,लिखाया , 

तथा उसकी सभी आर्थिक, शैक्षणिक , सभी कामनाओ की सभी तरह से  पूर्ती की ! फलस्वरूप उसका पुत्र एक सफल इंसान बना और एक मल्टी नेशनल कंपनी में सी इ ओ बन गया ! उच्च पद ,अच्छा वेतन, सभी सुख सुविधाए उसे कंपनी की और से प्रदान की गई !समय गुजरता गया उसका विवाह एक सुलक्षणा कन्या से हो गया ! और उसके एक सुन्दर कन्या भी होगई ! पिता अब बूढा हो चला था ! एक दिन पिता को पुत्र से मिलने की इच्छा हुई और वो पुत्र से मिलने  उसके शहर में उसके ऑफिस में गया ! वहां  उसने देखा की उसका पुत्र एक शानदार ऑफिस का मालिक बना  हुआ है उसके ऑफिस में सेकड़ो कर्मचारी  उसके मातहत कार्य कर रहे है ! ये सब देख कर पिता का सीना गर्व से फूल गया !वो चुपके से उसके चेंबर में पीछे से जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ा हो गया !और प्यार से अपने पुत्र से पुछा “इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान  कौन है”? पुत्र ने पिता को बड़े प्यार से हसते हुए कहा ” मेरे आलावा कौन हो सकता है पिताजी “!पिता को इस जवाब की  आशा नहीं थी, उसे विश्वास था की उसका बेटा गर्व से कहेगा पिताजी इस दुनिया के सब से शक्तिशाली इंसान आप है जिन्होंने मुझे इस दुनिया का इतना शक्तिशाली बनाया !उनकी आँखे छलछला आई ! वो चेंबर के गेट को खोल कर बाहर निकलने लगे !उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर पुनः बेटे से पुछा एक बार फिर बताओ  इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान कौन है ?पुत्र ने  इस बार कहा “पिताजी आप है इस दुनिया के सब से शक्तिशाली इंसान “! पिता आश्चर्यचकित हो गए उन्होंने कहा “अभी तो तुम अपने आप को इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान बता रहे थे अब तुम मुझे बता रहे हो “! पुत्र ने हसते हुए उन्हें अपने सामने बैठाते  हुए कहा “पिताजी उस समय आप का हाथ मेरे कंधे पर था , जिस पुत्र के कंधे पर या सर पर पिता का हाथ हो वो पुत्र तो दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान ही होगा ना , बोलिए पिताजी”  ! पिता की आँखे भर आई उन्होंने अपने पुत्र को कस कर के अपने गले लग लिया !

सच है जिस के कंधेपर या सर पर पिता का हाथ होता है वो इस दुनिया का सब से शक्तिशाली  इंसान होता है !

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-:एक पिता:-

गोर कैलास डी राठोड

सामाजिक कार्यकर्ता ठाणे मुंबई,

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