लोकतंत्र में चुनाव चिन्हों की महत्वता

दोस्तों ,
जय भारत जय बंजारा

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि देश में लोकसभा चुनाव की चर्चा चारों ओर है ऐसे में लोकतंत्र में देश के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले सिंबल यानी चुनाव चिन्ह की महत्वता यकायक बढ़ जाती है/

आओ जानने का प्रयास करते हैं चुनाव चिन्ह के इतिहास के बारे में आखिर क्यों आवश्यक होता है चुनाव चिन्ह ?
दोस्तों 1950 के दशक में आम चुनाव होने थे यह वह दौर था आजादी के बाद का जहां लोकतंत्र जीत रहा था ऐसे में चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी थी जो सरल हो अर्थात ऐसे मत पत्र की आवश्यकता थी जिसे पढ़ना देखना सरल हो

1921 में लंदन में एक सम्मेलन के दौरान न्याय प्रणाली चुनाव आदि लोकतंत्र की परिभाषा से अवगत कराने इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था /

मतपेटी का बॉक्स पर ही चुनाव चिन्ह चिपका दिया जाता था उसे ही देखकर वोट डाला जाता था /

1951 में राजनीतिक पार्टियों की मीटिंग हुई// चुनाव चिन्ह का चयन mr M S Sathi द्वारा चित्र बनाकर अपना बहुमूल्य योगदान दिया /देश में अशिक्षित 80% उस दौर में जनता थी //इसलिए एससी एसटी के 2 सदस्य चुने गए //
1951 में लगभग 18 परसेंट साक्षरता देश में थी //
1995 मी देश में राजनीतिक पार्टियां की संख्या 54
2014 में यह संख्या 475 हो गई
और वर्तमान में 2019 में यह संख्या 2293 हो गई है

1968 एक्ट के तहत आरक्षण ,आबट्न है/

दोस्तों / 1885 में कांग्रेस पार्टी की स्थापना हुई 1977 में चुनाव चिन्ह पंजा मिला
1980 में ही भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ और 6-4 -1980 में जो कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उपयोग किया गया था इसलिए कमल का चिन्ह चुना गया

CPI–1949 स्थापित चुनाव चिन्ह घड़ी जो 10:10 दिखाती है

BSP– स्थापना 1984 चुनाव चिन्ह हाथी अथार्त शक्ति से भरपूर/

देश में राष्ट्रीय पार्टियां –7

राज्य पार्टियां –24

निर्दलीय– चुनाव आयोग द्वारा चुनाव चिन्ह दिया जाता है /

दोस्तों आप ने जाना कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए 1951 के दशक में सरकारी कर्मचारियों चुनाव आयोग द्वारा देश में चुनाव चिन्ह तथा न्याय प्रणाली को बनाए रखने हेतु उस दौर में कितनी माथापच्ची हुई होगी और देश में लोकतंत्र कायम, व कामयाब बनाने के लिए अनेक चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों की भूमिका कितनी सराहनीय और महत्वपूर्ण रही है//

इसलिए दोस्तों आपका चुनाव में भाग लेना देश की एकता अखंडता प्रजातंत्र विकास हेतू सही निर्णय द्वारा सही नेता का चुनाव यह सब आप पर निर्भर करता है ,सही मायने में किसी भी देश को चलाने में आम जनता का ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है हमें दूसरी पर उंगली उठाने की बजाए लोगों को सही मार्गदर्शन देना चाहिए ताकि देश हमेशा मजबूती के साथ इसी प्रकार बना रहे कहते हैं
(( *उंगली लगाई नहीं तो उठाइए भी मत* ))इसलिए अपने मत का भरपूर प्रयोग करें जागरूक हो और जागरूक करे / आओ देश के भविष्य पर मोहर लगाएं ?
*जय हिंद जय भारत जय बंजारा*

*आपका बंजारा सेवक*

बंजारा आरके राठोर एडवोकेट

*संपादक –बंजारा प्रगति दिल्ली विद इंडिया*

*न्यायिक नायक –राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र*

*अध्यक्ष –ऑल इंडिया बंजारा सेवा संघ दिल्ली प्रदेश*

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