वंचित वर्ग के सामाजिक न्याय के महानायक हैं हरिभाऊ राठौड़

*वंचित वर्ग के सामाजिक न्याय के महानायक हैं हरिभाऊ राठौड़*

डी एन टी व एमबीसी के सामाजिक न्याय के लिए मिशन के रूप में काम करते आ रहे राठौड़
हरिभाऊ राठौड़ यवतमाल(महाराष्ट्र) के पूर्व सांसद व वर्तमान में कांग्रेस की ओर से महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य है।2003 से बंजारा क्रांति दल(सामाजिक संस्था)के माध्यम से आप विमुक्त भटक्या जनजातियों,अत्यंत पिछड़ों व वंचित् वर्गों के पृथक आरक्षण के लिए संघर्ष करते हुए आज देश के विमुक्त,घुमन्तू, अर्द्धघुमन्तु, अतिपिछडे,अत्यंत पिछडेवर्ग के महानायक के रूप में काम रहे हैं।आपके संघर्ष का परिणाम इसी साल के अंदर वंचित वर्गों को मिल जाएगा।आप वंचितों के आरक्षण व सामाजिक न्याय की लड़ाई राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं ,बल्कि जीवन की सार्थकता के लिए मिशन के रूप में बिना थके रुके अनवरत लड़ते आ रहे हैं,जिसका परिणाम जस्टिस रोहिणी राष्ट्रीय ओबीसी उपवर्गीकरण जांच आयोग के रूप में सामने दिख रहा है।

प्रतिवर्ष 5 जनवरी को आप द्वारा आज़ाद मैदान,मुम्बई में विमुक्त भटक्या मेलावा व मोर्चा के आयोजन किया जाता है,जिसमे महाराष्ट्र के कोने-कोने से लोग इकठ्ठा तो होते ही हैं,अन्य राज्यों के भी प्रतिनिधि शामिल होते हैं।मान्यवर हरिभाऊ राठौड़ विशाल हृदय के धनी अत्यंत मिलनसार व समस्याओं के समाधान के लिये लगनशील महामानव हैं।*
*अपने लिए जिये तो क्या जिये,जीना उसी का सार्थक है ,जो दूसरों के लिए जिये*
हरिभाऊ राठौड़ जी की दिनचर्या उक्त चरित्र-चिंतन से अभिप्रेरित है और आप पूरी ततपरता से लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्य करते आ रहे हैं।

थर्ड शेड्यूल बनाने की मांग-

22जनवरी,2004 में पण्ढरपुर में धनगर महासम्मेलन का आयोजन किया गया था।जिसमे अटलबिहारी बाजपेई जी के अत्यंत करीबी प्रमोद महाजन,गोपीनाथ मुंडे,प्रकाश शेनके के साथ हरिभाऊ राठौड़ भी शिरकत किये।राठौड़ जी ने विमुक्त भटक्या जनजातियों(डी एन टी)के लिए एससी/एसटी के समान आरक्षण व्यवस्था के लिए तीसरी अनुसूची/थर्ड शेड्यूल बनाने की मांग जोरशोर से उठाया।इस मांग को महाजन जी ने प्रधानमंत्री अटल जी के सामने रखे।15 अगस्त,2003 को प्रधानमंत्री जी ने लालकिले के प्राचीर से झंडारोहण के बाद राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में कहा कि विमुक्त घुमन्तू वंचित जनजातियों को सामाजिक न्याय देने के लिए आरक्षण की तीसरी अनुसूची बनाई जाएगी।
2003 में जस्टिस बी.मोतीलाल नायक जी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विमुक्त जाति आयोग का गठन हुआ,जिसमे हरिभाऊ राठौड़जी भी सम्मानित सदस्य रहे,लेकिन 2004 में कांग्रेस नीत यूपीए सरकार बनने पर आयोग को भंग कर दिया गया।सांसद राठौड़ विमुक्त भटक्या वंचित वर्गों के सामाजिक न्याय के लिए अनवरत संघर्ष करते रहे।आपने यूपीए सरकार के सामने डीएनटी,वीजेएनटी के लिए आयोग गठन की मांग करते रहे।मार्च 2006 में आपके प्रयास से बालकृष्ण सिद्धराम रेणके की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय राष्ट्रीय विमुक्त,घुमन्तू एवं अर्द्धघुमन्तू जनजातीय आयोग का गठन किया गया।इस आयोग ने 2 जुलाई,2008 को तत्कालीन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मीरा कुमार व 20 जुलाई,2008 को प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को संस्तुतियों व सिफारिशों के अपनी रपट सौंप दिया।

*निजी बिल व संकल्प पत्र-*

सांसद हरिभाऊ राठौड़ जी ने 2008 में अपने सुझावों के साथ रेणके आयोग के संदर्भ में निजी बिल व संकल्प पत्र संसद में लाये और चर्चा किये।17 सांसदों ने चर्चा में भाग लिया।राठौड़ की मांग रही कि एससी,एसटी की ही भांति वीजेएनटी/डीएनटी के लिए थर्ड शेड्यूल/तीसरी सूची बनाई जाए और हर स्तर पर इन्हें 10% कोटा दिया जाए।
*तीसरी अनुसूची क्यों?*
राठौड़ को देखने में आया कि अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल कराना अत्यंत कठिन है,क्योंकि पहले से लाभ पा रही जातियों के सांसद दल से ऊपर उठकर एकजुट हो विरोध में खड़े हो जाते हैं।राठौड़ को लगा कि एससी/एसटी में लाने के लिए प्रयास कहीं विफल न हो जाये,सो इन्ही की सुविधाओं की व्यवस्था व कोटा को वीजेएनटी/डीएनटी की तीसरी अनुसूची बनाकर 666 जनजातियों को आरक्षण कोटा व सामाजिक न्याय के लिए आवाज़ उठाना व आंदोलन चलाना शुरू किये।महाराष्ट्र व बंजारा जाति के दायरे से ऊपर उठकर 666 विमुक्त भटक्या जनजातियों व 444 अत्यंत पिछड़ी जातियों के हक हकूक की लड़ाई लड़ने के लिए राष्ट्रीय विमुक्त भटक्या जनजाति महासंघ का गठन किये।मध्यप्रदेश,उत्तरप्रदेश,गुजरात,आन्ध्रप्रदेश,कर्नाटक,हरियाणा,राजस्थान आदि राज्यों का दौड़ाकर मल्लाह,केवट,कहार,कोळी,भोई,गड़ेरिया,राजभर,नोनिया,धीवर,लोधी,नायक,सपेरा,कलन्दर,मदारी,जोगी,नट,सिगलीगर,बृजवासी,चमरमंगता,बंजारा,धनगर आदि को जोड़े।आंदोलन को आज़ाद मैदान से जंतर मंतर तक लाकर संघर्ष मजबूत तेवर दिए।

एनटी,डीएनटी,वीजेएनटी हक के लिए एक हो-

17-11-2011 को रवींद्रालय लखनऊ में राष्ट्रीय विमुक्त घुमन्तू अर्द्धघुमन्तू जनजाति महासंघ व राष्ट्रीय निषाद संघ की ओर से महासम्मेलन का आयोजन किये जिसमे कांग्रेस दर्जनों बड़े नेता शिरकत किये।सम्मेलन में निषाद,कश्यप,बंजारा,बिंद,पाल्,राजभर,लोधी,धनगर,चौहान,गड़ियालोहार,नायक,मेवाती,नट,सिगलीगर,मदारी,बहेलिया,कानबेलिया ,सपेरा,कलन्दर आदि संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।हरिभाऊ जी ने हक के लिए एकजुट हो हल्ला करने का आह्वान किये।
*ऊंची सोचो बड़ा लक्ष्य लेकर चलो*
हरिभाऊ जी यवतमाल से सांसद रहे।इस समय महाराष्ट्र विधान परिषद के सम्मानित सदस्य हैं।महाराष्ट्र में विमुक्त भटक्या जमाती(डीटी,एनटी)को पहले से 11% आरक्षण मिल रहा है।पर ये अन्य राज्य के वंचित वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाकर उन्हें ऊपर उठाने का संकल्प है।व्यापक सोच व दायरे से आबद्ध राठौड़ बिना थके बिना रुके लक्ष्य के लिए सकारात्मक दिशा में प्रयास जारी रखे हैं।वे कहते हैं-ऊँची सोच रखकर बड़ा काम करो।
*डॉ.भीमराव रामजी आम्बेडकर व कांसीराम जी महराष्ट्र की सामाजिक क्रांति की धरती से आंदोलन करने के बाद उत्तर प्रदेश को प्रयोगशाला बनाये।हरिभाऊजी भी महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में जनजागृति अभियान शुरू किए।गाज़ीपुर,जौनपुर,लखनऊ,फर्रुखाबाद,कानपुर देहात,लखीमपुरखीरी,वाराणसी,इलाहाबाद,कानपुर,मैनपुरी,आगरा,फिरोजाबाद आदि जिलों का दौरा किये।आपके व्यक्तित्व-कृतित्व में डॉ.अम्बेडकर व मान्यवर कांसीराम जी छवि झलकती है।

निषाद,नाविक,मल्लाह को महराष्ट्र की राजकीय जाति सूची में दिलाये स्थान-
महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में निषाद,मल्लाह,नाविक आदि लम्बे समय से रह रहे हैं,पर उन्हें महाराष्ट्र की राजकीय जाति सूची में स्थान नहीं मिला था।जबकि भोई जनजाति के साथ मांझी,केवट,धीवर,धीमर,गोड़िया कहार,धूरिया कहार,जिला भोई,राजे भोई,मछुआ,मछुवा,मछेन्द्र,ढेबर,कीर,मल्हार,मल्हाव,किरात,ख़ासेभोई,माछी आदि को भटक्या जमाती (नोमेडिक ट्राइब्स)में रखा गया था।इस विसंगति से आपको अवगत कराया।इन्होंने कहा इन्हें न्याय दिलाएंगे।5 जनवरी,2011 को आज़ाद मैदान में विमुक्त भटक्या मेळावा का आपके नेतृत्व में आयोजन किया गया।मैँ भी इनके बुलावे पर गया।इस मेलावा में कांग्रेस के महराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे व मुम्बई प्रदेश अध्यक्ष तथा गृहराज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह शामिल रहे।उनके समक्ष मल्लाह,निषाद,नाविक को महाराष्ट्र की राजकीय सूची में शामिल कर भोई के साथ रखने सम्बन्धी प्रस्ताव रखा।राठौड़ जी इस काम में जुटे रहे।अंततोगत्वा 29 सितंबर,2013 को इन जातियों को भटक्या जमाती में स्थान मिल गया।

एनटी,डीटी,वीजेएनटी व एमबीसी को न्याय दिलाने को लेकर संघर्ष-

विमुक्त भटक्या जमाती के साथ अतिपिछड़ी अत्यंत पिछड़ी जातियों को मण्डल कमीशन के सदस्य एल.आर.नायक जी के डिसेंट नोट के आधार पर आरक्षण कोटा व सामाजिक न्याय दिलाने के लिए राष्ट्रीय विमुक्त घुमन्तू अतिपिछडावर्ग महासंघ के गठन किये।आप राष्ट्रीय पिछडावर्ग आयोग के अध्यक्ष बी.ईश्वरैया को ओबीसी का सबडिवीजन व कटेगराइजेशन करने के लिए प्रत्यावेदन दिए।
संघर्ष में दिखी आशा की किरण-

राष्ट्रीय पिछडावर्ग आयोग ने ओबीसी सबडिविजन के लिए काम शुरू किया और फरवरी,2014 में केंद्र सरकार को अपनी रपट सौपा,जिसमे ओबीसी का 3 उपश्रेणियों में विभाजन कर 9-9% आरक्षण की सिफारिश किया।

प्रधानमंत्री मोदी से मिल दिए पत्र
हरिभाऊ राठौड़जी ने 5 मार्च,2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछडेवर्ग का उपवर्गीकरण कर अलग अलग आरक्षण दिए जाने का प्रस्ताव दिए।प्रधानमंत्री ने इसे गम्भीरता से लेते हुए अतिपिछडेवर्ग व विमुक्त घुमन्तु जनजातियों को आरक्षण दिलाने का आश्वासन दिए।29 सितम्बर,2015 को दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिणी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग उपवर्गीकरण जांच आयोग का गठन किया गया,जिसे 6 महीने में अपनी रपट देने का निर्देश दिया गया।जिसका तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाते हुए 20 जून 2018 तक रिपोर्ट सौंपनी थी,लेकिन विशेष आग्रह पर 31 जुलाई तक कार्यकाल बढा दिया गया है।

राठौड़ के संघर्ष को सफलता मिलने की बढ़ी सम्भावना

हरिभाऊ राठौड़जी का अतिपिछड़ों,अत्यंत पिछडों,विमुक्त घुमंतू जनजातियों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए जो संघर्ष जारी है,उसे सफलता मिलने की संभावना बढ़ गयी है।जस्टिस रोहिणी आयोग की सिफारिश व रपट के आधार पर अक्टूबर,2018 में सफलता मिल जाने के पूरे आसार हैं,साथ राष्ट्रीय सामाजिक शैक्षणिक पिछडावर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा।पर संघर्ष को धीमा न कर और तेज़ करने की जरूरत है।
*राठौड़जी ने बताया कि महाराष्ट्र में मेरे बंजारा जमात के लोग एसटी और उत्तर प्रदेश के बंजारा,निषाद,केवट,बिन्द,मल्लाह,धीमर,धीवर,कहार,मांझी,राजभर आदि जाति के लोग अनुसूचित जाति के अंतर्गत आरक्षण मांग रहे थे।हमने देखा कि इस मांग का बहुत विरोध है।एससी,एसटी के सांसदों के साथ इनके सभी संगठन एकजुट हो प्रबल विरोध कर रहे,सो लगा इस आंदोलन का सार्थक परिणाम काफी कठिन है।इसलिए एससी,एसटी की तरह तीसरी अनुसूची बनाकर आरक्षण कोटा की मांग की कार्ययोजना बनाया,जिसका सुखद परिणाम इसी साल में मिल जाने की पूरी संभावना है।

*चौ.लौटनराम निषाद*
*9415761409/8004620648*

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