Month: March 2017

“भाटा (दगड) भावना शुन्य छ”

भाटा (दगड़)भावना शून्य छ…. ✍ सुखी चव्हाण ,बदलापुर आज समाजेर स्थिति अतिशय द्रावक़ छ.बालबच्यार शिक्षण,महिला ,वयोवृद्ध नगरीकेर एनुर आरोग्य चिंतनीय छ भरपूर आन्ध श्रद्धा छ .निर्मूलन हेनु आवस्यक
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“डिजीटल इंडिया मध्ये तांडा अजूनही हरवतोय”

डिजीटल इंडियामध्ये तांडा अजूनही हरवतोय..! “सोशल अॉडीट होणे आता गरजेचे”.   ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: :-आज प्रत्येक घटकाच्या अवस्थेला बुलेटट्रेनची जोड लाभत असताना,आमच्या न्यायवंचित तांड्याच्या अवस्थेला किमान ‘शंकुतला आगगाडी’चीही वेग लाभू
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बंजारा लेंगी चांदा जपजो,ये लेंगी माइर सौंदर्य दर्शन”

” चांदा…जपं..जो…!” ये लेंगी माइर सौंदर्य दर्शन..! चांदा जपं..जो..! ये लेंगीर रसग्रहण करतूवणा; सेर आंगड्या लेंगी कतो कायी? इ समजन लेणू महत्वेर छ. ” वाड;मय अन कला क्षेत्रेमाइरो
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“गोरमाटी अन् बोली भाषार दर्जा”:- भास्करभाऊ (भासू) राठोड ठाणे,

*गोरमाटी* *आन बोली भाषार दर्जा*   गोरमाटी नीसरग पूजक छं हानू जर आपण समजा छा, आन गोरमाटीरो संवसारेर जर आधार आपण बायीमनकीयान ( महिला ) माना छा, याडी
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“गोरमाटी गोरबोली भाषान,भाषार दर्जा कु कांयी मळीय..? एक वैचारिक अभियान”

“जय गोर….जय सेवालाल…जय वसंत” “गोरमाटी गोरबोली भाषान भाषार दर्जा कुकंळ मळीय ? — एक वैचारिक अभियान” ✍ प्रा.दिनेश सेवा राठोड                
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“गोरमाटी गोरबोली भाषान,भाषार दर्जा कु मळीय..? एक वैचारिक अभियान” 

जय सेवालाल गोरमाटी गोरबोली भाषान भाषार दर्जा कुकंळ मळीय ? — एक वैचारिक अभियान ✍ प्रा.दिनेश सेवा राठोड 〰〰〰〰〰〰〰 भाग-2 लारेर 50 सालेम  भारतेर  जवळपास  20 टका भाषा
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“सामाजिक सकारात्मक विचार गोर समाजेन तार सकच”

🙏🏻सामाजिक सकारात्मक विचार गोर समाजेंन तार सकच🙏🏻 सामाजिक जानिव व सामाजिक समस्या इ आपन शिके साके लोक व समाजे सारू काम करेवाली विविध गोर संघटन एनुन नैतिक जबाबदारि
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“बंजारा ‘जात’चोर छ,तार माथेप विमुक्त यी कलंक छ”

​गोर बंजारा तार जात चोर छ तार माथेप विमुक्त इ कलंक छ। लेखक:-सुखी चव्हाण,बदलापुर इंग्रेजेरर आंगाड़ी ब्रिटानी हुकूमत हेती जना गोर समाज लढ़वया व्हेतो ऊ मोगले विरूद्ध महाराणा
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“गोरमाटीर साकी”:- भिमणीपुत्र,

” वाते मुंगा मोलारी ” भीमणीपुत्र ” साकी “- ‘ भाषा शास्त्रेर अभ्यासकेनं भुळी खरायेवाळे गोर बोली भाषा मौखिक साहित्ये माइर ‘ साकी ‘ ये शब्देरो आरथ जर
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