Author: Kailash Rathod

गोर बोलीभाषारो अलंकार संपन्न लावण्य रुप – उत्प्रेक्षा…भिमणीपुत्र,

वाते मुंगा मोलारी My swan song गोर बोलीभाषारो अलंकार संपन्न लावण्य रुप – उत्प्रेक्षा… अलंकार संपन्न गोर बोलीभाषारो लावण्य रुप इ गेणागाठा घालन सणगारी हुयी याडीभेनेर रुपेनाई नंजरेमं
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गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन…!:- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी My swan song गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन…! गोर बोलीभाषार अभ्यास करतूवणा गोर बोलीभाषारो पेनो (प्राचीनता),ओर जतन करो हूवो परंपरागत मौखिक सायित्य,ओर भाषा
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धनात्री..भिमणीपुत्र मोहन नायक

वाते मुंगा मोलारी My swan song धनात्री…. “हामार तांडेमं पानढाळ करेवाळर ८\१० मनक्यार एक टोळी छ.ओनेनं मोट धनात्रीवाळ कचं.आज ओ से भळन रानेम जान पूजापाती करन धनात्रीर उजळणी
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धडधडी- थरथरी एक वैज्ञानिक सिद्धांत..!:- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी My swan song धडधडी- थरथरी एक वैज्ञानिक सिद्धांत..! “देवीनं बळी देयेर पाट मरेन आरीती करन;मन बेमार पाट बळी देरे छो;येती देवी आपणेनं पावं कोनी ये
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पुस्तक इन्ती पुस्तक करचं..!:- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

राम पोर – “तैलात रक्षेत जलात रक्षेत रक्षेत शिथिल बंधनात! मुर्ख हस्ते न दातव्यं ! एवं वदति पुस्तकम् ! तेलेती,पाणीती छेटी रकाडन मार रक्षण करो अन मार भांदणी
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तमारो आजेरो “गोरबोली भाषा विज्ञान अन् व्याकरण ” – एक चिंतन !! भाग – २ ,- मा.राजाराम जाधव,नवी मुंबई,

नायक जी, जय सेवालाल, तमारो आजेरो “गोरबोली भाषा विज्ञान अन् व्याकरण ” – एक चिंतन !! भाग – २ , “गोर बोली भाषारो भाषिक रूप ” ए लेखांके
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गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – चिंतन! भाग २- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – चिंतन! भाग २ गोर बोलीभाषारो भाषिक रुप – गोर बोलीभाषारो ऐतिहासिक भाषाशास्त्र हूबो करेनं गोर बोलीभाषा मौखिक
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गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन ! (भाग २ ):- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारीMy swan song गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन !(भाग २ ) भाषार अभ्यासेमं भाषार सामाजिक डिलेसामू दुर्लक्ष करतूज आयेनी.भाषारो सामाजिक डील कतोज समाजभाषाविज्ञान.”भाषेच्या समाजातील
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गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन..! :- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण – एक चिंतन..! गोर बोलीमं भाषार अलंकार छ.रस,काव्यगुण अन ओर मालकीर अलंकारिक शब्देती गोर बोलीभाषा परिपूर्ण छ तो
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चांदा माईर डोकरी,साकी :- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song चांदा माईर डोकरी…! पेना एक डोकरी दल्डामं रेतीती.एक दन हातेम बांण्णी लेन आंगणो झाडेसारू दल्डा माईती भारं निकळी. झाडतू झाडतू ओर कड
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