Author: Kailash Rathod

गोर संस्कृतिर आलग औळख छ,घटी पिसतू वणार गित:- आरजूनीया भूकिया,

++++ घटीपरीयार गीद+++++ ,,मारे यीरारी वारसेकी माढी यं मारी माढी तो बायी पढ़ी आन झढी यं मारो यीरा रोज तो दूधबाटी खाव य फ़ोन कीदी कलाग तो जोरेती
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गोर बोलीभाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषाविज्ञान (sociolinguistics) :- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song गोर बोलीभाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषाविज्ञान (sociolinguistics) गोरबोली बोलीभाषा व्यवहार इज खरो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषाविज्ञान छ.आज मराठी वगैरे अन्य भाषार प्रभावेती गोर बोलीभाषा
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गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषाविज्ञान (Sociolinguistics) :- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषाविज्ञान (Sociolinguistics) गोरबोली भाषार अभ्यास करतूवणा गोरबोली भाषारो सामाजिक संदर्भ कतो गोरबोली भाषा व्यवहार कतोज समाज
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गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषा विज्ञान (Sociolinguistics):- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषा विज्ञान (Sociolinguistics) – छोरा सारी रातेर वणान खासरो छ,कांयी कोबली वेगी छ क,कांयी कागलामागला पडगो छ को
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गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषा विज्ञान (sociolinguistics):- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषा विज्ञान (sociolinguistics) भाषार अलंकार,नऊ रस,नऊरसेर नऊ स्थायीभाव,काव्यगुण अन केणावट,साकी,साकतर ओर मालकीर अलंकारिक शब्देर श्रीमंतीती गोरबोली
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गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषा शास्त्र/समाज भाषा विज्ञान..!- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

वाते मुंगा मोलारी my swan song गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषा शास्त्र/समाज भाषा विज्ञान..! – कतरी कतरा छेळीन फाडनाके. – घडीखांड एराम भी कर लेणू. – मुंडो लगाडेन कांयी
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अदभुत”ई लेंगी माईरो एक वास्तव..!,:- भिमणी पुत्र मोहन नायक,

*वाते मुंगा मोलारी*my swan song*”अदभुत”ई लेंगी माईरो एक वास्तव..!*”अदभुत”इ सायित्य अन संस्कृती माईरो वास्तव छ.येनं गोर बनजारा संस्कृती अन सायित्य भी अपवाद छेनी.ताना छच्यापर कनायी कनायी हासतूवणा आढळ
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गोरबोली: एक चिंता,एक चिंतन:- भिमणी पुत्र,मोहन नायक,बंजारा वरिष्ठ साहित्यकार,

!! गोरबोली: एक चिंता,एक चिंतन!! गोर बोलीभाषा पिढ्यांनं पिढ्यापासुन प्रवाहित होत आली आहे.कालौघात स्वतःची लिपी नसल्यामुळे देवनागरी लिपीतील तिचे ठराविक स्वरुप निश्चित झाले आहे. गोरबोली बोलणा-या गोरबंजारा समाजात
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गोरमाटी समाजेम जांगड जांगड भेळेर रीत….जांगड भेळेरो..?

वाते मुंगा मोलारी My swan song जांगड….जांगड भेळेरो..? जांगड व्यक्ती बाबत आर.व्ही रसेल आणि राय बहादूर हिरालाल,चाईल्डर्स अशा अनेक अभ्यासकांनी सांगोपांगी वढाळ विधाने ठोकून सत्याला कलाटणी देण्याचा केविलवाणा
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उपर बोले बाबडीया तोनं कू आवं घेरी निंदा?:- भिमणीपुत्र

वाते मुंगा मोलारीMy swan song जागो…जागो…गोर भायी/भेनो..!उपर बोले बाबडीया तोनं कू आवं घेरी निंदा? पुर्वाश्रमीर चोरगुन्हेगारीर ओळख करन चोट्टी गावडीनायी गळेमं “विमुक्त”नामेरो डिंगरो आडकान एक नाकारो हुवो आयुष्य
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