Author: Raviraj S. Pawar

गोरबोली भाषेचे अस्तित्व धोक्यात – भीमणीपुत्र मोहन नाईक

*गोरबोली भाषेचे अस्तित्व धोक्यात*- *भीमणीपुत्र* सारखानी- (11.5.018 ) भाषावार प्रांत निर्मितीमुळे गोरबोली भाषेचे मूळ अस्तित्व आज धोक्यात आलेले असून गोरबोली भाषेचे सामाजिक भाषाशास्त्र म्हणजेच भाषा विज्ञान भ्रष्ट होण्याच्या
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बालपण, कवी – विनोद राठोड, कल्याण

बालपण कयीवणा बोरेरे काटामाई आडकन फाटतेते झिगला पिसा कोणी रेतेते खिश्याम दोस्ता मातर वेते ढगला… उनाड दन ; उनाड मन बादशाही वेते थाट डांबरेरो रस्ता ती तो लाख
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ये या धूंढू कत ये तोन, बंजारा कवीता कवी: ईश्वर राठोड , पेण.रायेगढ

*याडी दनेर शुभेच्छा* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ये या धूंढू कत ये तोन.. हारदं करन ये तोन.. जीवडा तूटरो छ मार.. तारे लाडेरे पीलान.. आब कूण दीय आधार.. वेती ये या
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सासरो गोरमाटि कविता, कवि: सुरेश मंगुजी राठोड़

सासरो *कतराको सोसू याड़ी,* *सासरेरो बळजो !* *केन कू ये याड़ी मारो,* *फाटे लागे कळजो………..!!१!!* *ससरो मळो गुलाम,* *सासू घण भारी छ !* *चलवादी नणंद,* *देवर तो बिगारी
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सासरो गोरमाटि कविता कवि: सुरेश मंगुजी राठोड़

🙏🏻😭 *!! सासरो !!*😭🙏🏻 🕸🕸🕸🕸🕸🕸🕸🕸 *कतराको सोसू याड़ी,* *सासरेरो बळजो !* *केन कू ये याड़ी मारो,* *फाटे लागे कळजो………..!!१!!* *ससरो मळो गुलाम,* *सासू घण भारी छ !* *चलवादी
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“आवगो देखो जिओ गोरमाटी कवीता” कवी: रविराज एस. पवार

आवगो देखो जिओ जरा हूशारेती रीयो। वेळ चालरोच भारी कठिन स्वतार पगेपर तम करार मारलियो।। आवगो व्हाट्सएप्प, फेसबुक देखो ऊठे सुटे लोग भारी बक। भिया आब तरी सदर
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