Category: banjara culture

गोरमाटी भीया: कविता युवा पीढ़ीरो कवि लखनकुमार जाधव,

*** भीया गोरमाटी *** येकजूट वेयेर गरज छ आब करा जतन से धाटी आलग आलग वीकरागे जे येक वेजावा से गोरमाटी  (1) चमकनताणी कू काडोचो आयुष्य  केरकेर लेयवाळ
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गोर बोलीरो विकास:गोर गणेरो विकास: भिमणीपुत्र 

गोरबोलीरो विकास : गोर गणेरो विकास जाहीर आभार…जाहीर आभार    ➖  भीमणीपुत्र,मोहन गणुजी नाईक 5 वो अ.भा.गोर बंजारा साहित्य संमेलन,मुंबई दि.13/14 जानेवारी 2018 न महाराष्ट्रेर राजधानी मुंबईनं संपन्न
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“गोरवयीवाट आन गोरवचारधारा!”

गोरवयीवाट आन गोरवचारधारा ! सारवजनीक जीवणेम सारी जगदनीयार समाजे सोबत रेयेर वीय तो कूणसे हासबेती रेरेरो. भारत देसेम संविंधानीक सत्ता छ आन भारत सरकारेरो कायदो छ.संविंधानीक कायदे परमाण
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संदर्भ- गोरमाटी संस्कृती आणि संकेत,गोर लोक साहित्य-होका दारू अन पानेर कडी”

 वाते मुंगा मोलारी          My swan song गोर लोक साहित्य- होका,दारू अन पानेर कडी… होका- जीभ बडी चलोकडी,सो समारकर बोल..! हिरा भरी कोठडी, वारू वारू
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“अखिल भारतीय गोर बंजारा साहित्य सम्मेलन मुंबई”

अखिल भारतीय गोरबंजारा साहित्य संमेलन , मुंबई  नागपूर विभागीय दौरा  दि . 03 – 09 – 2017 ला नागपूर येथे जागृती अभियान द्वारा आयोजित कार्यक्रमात मुंबई येथे होणाऱ्या
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नसाब व्हाटसाप गृप निष्कर्ष 

*दुसरे नसाब विषयेरो निष्कर्ष*  —————————————-  सारी गोरभाई भेनेऊन,  जय सेवालाल !      नसाब ग्रुप समाजेन भावरोच , ई आनंदेर वात छ .    नसाबेरो दुसरो विषय श्री
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