Category: banjara culture

संदर्भ- गोरमाटी संस्कृती आणि संकेत,गोर लोक साहित्य-होका दारू अन पानेर कडी”

 वाते मुंगा मोलारी          My swan song गोर लोक साहित्य- होका,दारू अन पानेर कडी… होका- जीभ बडी चलोकडी,सो समारकर बोल..! हिरा भरी कोठडी, वारू वारू
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“अखिल भारतीय गोर बंजारा साहित्य सम्मेलन मुंबई”

अखिल भारतीय गोरबंजारा साहित्य संमेलन , मुंबई  नागपूर विभागीय दौरा  दि . 03 – 09 – 2017 ला नागपूर येथे जागृती अभियान द्वारा आयोजित कार्यक्रमात मुंबई येथे होणाऱ्या
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नसाब व्हाटसाप गृप निष्कर्ष 

*दुसरे नसाब विषयेरो निष्कर्ष*  —————————————-  सारी गोरभाई भेनेऊन,  जय सेवालाल !      नसाब ग्रुप समाजेन भावरोच , ई आनंदेर वात छ .    नसाबेरो दुसरो विषय श्री
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“गोरमाटी गोरबोली भाषान,भाषार दर्जा कु कांयी मळीय..? एक वैचारिक अभियान”

“जय गोर….जय सेवालाल…जय वसंत” “गोरमाटी गोरबोली भाषान भाषार दर्जा कुकंळ मळीय ? — एक वैचारिक अभियान” ✍ प्रा.दिनेश सेवा राठोड                
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“गोरमाटीर साकी”:- भिमणीपुत्र,

” वाते मुंगा मोलारी ” भीमणीपुत्र ” साकी “- ‘ भाषा शास्त्रेर अभ्यासकेनं भुळी खरायेवाळे गोर बोली भाषा मौखिक साहित्ये माइर ‘ साकी ‘ ये शब्देरो आरथ जर
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