Category: banjara culture

नसाब व्हाटसाप गृप निष्कर्ष 

*दुसरे नसाब विषयेरो निष्कर्ष*  —————————————-  सारी गोरभाई भेनेऊन,  जय सेवालाल !      नसाब ग्रुप समाजेन भावरोच , ई आनंदेर वात छ .    नसाबेरो दुसरो विषय श्री
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“गोरमाटी गोरबोली भाषान,भाषार दर्जा कु कांयी मळीय..? एक वैचारिक अभियान”

“जय गोर….जय सेवालाल…जय वसंत” “गोरमाटी गोरबोली भाषान भाषार दर्जा कुकंळ मळीय ? — एक वैचारिक अभियान” ✍ प्रा.दिनेश सेवा राठोड                
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“गोरमाटीर साकी”:- भिमणीपुत्र,

” वाते मुंगा मोलारी ” भीमणीपुत्र ” साकी “- ‘ भाषा शास्त्रेर अभ्यासकेनं भुळी खरायेवाळे गोर बोली भाषा मौखिक साहित्ये माइर ‘ साकी ‘ ये शब्देरो आरथ जर
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“गोर बोलीभाषा साधित शब्द औळख

​” वाते मुंगा मोलारी ” भीमणीपुत्र ‘ गोर बोलीभाषा साधित शब्द ओळख ‘ अभ्यस्त शब्द प्रकार- आगळपगळ,आगलबगल, सेजारीपाजारी. अंशाभ्यस्त शब्द प्रकार – हाळदमाळद,आडोतेडो, ओळोसोळो, सामळीसुमळी, पामणपइ, भांदीभुंदी, हाळीफुंग,
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गोर बोलीभाषा साधित शब्द ओळख -भीमणीपुत्र

​” वाते मुंगा मोलारी ” –भीमणीपुत्र ‘ गोर बोलीभाषा साधित शब्द ओळख ‘ अभ्यस्त शब्द प्रकार- आगळपगळ,आगलबगल, सेजारीपाजारी. अंशाभ्यस्त शब्द प्रकार – हाळदमाळद,आडोतेडो, ओळोसोळो, सामळीसुमळी, पामणपइ, भांदीभुंदी, हाळीफुंग,
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“बंजारा समाज के सभी युवकों को यह शपथ ग्रहण करणी होगी”

​!!शपथ!!! संत क्रांतिवीर जगतगुरु सेवालाल बापू के जयंतीअवसर पर ये शपथ लें कि हम हमारी संस्कृति ठीक से याद करे और कोई भी काम या वाच्यता से समाजद्रोह
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“बंजारा समाज सदियो पूराना”

भारत की सबसे सभ्य और प्राचीन संस्कृती सिंधु संस्कृती को माना गया है। इसी संस्कृती से जुड़ी हुई गोर- बंजारा संस्कृती है और इस गोर बंजारा समाज का 
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“अखिल भारतीय बंजारा समाज साहित्य सम्मेलन-केवळ गोर संस्कार व गोर साहित्यानेच व्हावे”

​*भाग -2* *बंजारा साहित्य संमेलन- काही तथ्ये व अपेक्षा*    ✍प्रा.दिनेश एस.राठोड      आपण जाणतो साहित्यच माणसाला सुसंस्कृत बनविते. .संस्कृतीचे संक्रमन करते.  आमच्या उमेदी  साहित्यिकांनी गोर विचारांच्या
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