Category: Artist-singer

गोर माटी कविता: लेखक,श्रीकांत पवार

सुधा…   💐🙏 तु आज चायवाळ रस….. सिमेर परं विठोबा……! कुंण जावं आतरी दुर… गाडीलारं नळीया, पायो पंढरपुर !! फुकट मळतो तो से, हर रेल चालं, वोतेताणी खावचं !
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दर्शन दो सेवालाल Raviraj Pawar

दर्शन दो सेवालाल दर्शन दो सेवालाल लाल मेरी आँखियाँ प्यासी रे ! मन मंदिर कि ज्योति जगा दो, गड- गड वासी रे !! मंदिर-मंदिर घर-घर मे मुरत तेरी
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Very Beautifully Written

ऐ सुख तू कहाँ मिलता है क्या तेरा कोई स्थायी पता है क्यों बन बैठा है अनजाना आखिर क्या है तेरा ठिकाना। कहाँ कहाँ ढूंढा तुझको पर तू
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